गुजराती लेखक - अजित पोपट
हिन्दी अनुवादक - कुमार अहमदाबादी
ता.11-02-2011 के दिन गुजरात समाचार की कॉलम सिने मैजिक
(लेखक - अजित पोपट) के एक दो पैरेग्राफ का आंशिक अनुवाद )
सेवा करने के उद्देश्य से गांव में बसे डॉक्टर और लगभग निरक्षर जैसी एक युवती जो एक बागी की पुत्री है; यूं तो इन दोनों में छत्तीस का आंकड़ा होना चाहिए। लेकिन कभी कभी एसी परिस्थिति में दिल के तार जुड़ जाते हैं। लेकिन एसे संबंध में जब हताशा निराशा प्रवेश करती है। तब मन के भाव को एसे शब्द “शाख से टूट के गुंचे भी कहीं खिलते हैं, रात और दिन जमाने में कहीं मिलते हैं, भूल जा जाने दे तकदीर से तकरार व कर, मैं तो एक ख्वाब हूं, उस ख्वाब से तू प्यार न कर” बहुत असरदार तरीके से व्यक्त करते हैं। कमर जलालाबादी के लिखे गीत को संगीत निर्देशक कल्याण जी आनंद जी ने राग तोडी के स्वरों में एवं छह मात्रा के दादरा ताल में स्वरबद्ध किया है। जिसे मुकेश ने बहुत ही गमगीन आवाज़ में गाया है। राग तोडी की बात निकली है तो इसी राग में बने एक और यादगार गीत को याद कर लें। डाकू रानी पूतली बाई के अत्याचार से त्रस्त गांववालों की वेदना एवं डाकूओं को सलाह देने के एक गायक गीत गाता है। गीत के शब्द “निर्धन का धन लूटने वालो लूट लो दिल का प्यार, प्यार वो धन है जिस के आगे सब धन है बेकार, इन्सान बनो, कर लो भलाई का कोई काम, दुनिया से चले जाओगे कर जाएगा बस नाम, इन्सान बनो….” है । ये गीत भी राग तोडी पर आधारित था।
